सबसे अच्छी वो कुर्बानी जो दे किसी को जिन्दगानी

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ईद मुबारक!

“#ईद_उल_अज़हा”
#मुबारक हो मेरे सभी #मुस्लिम भाईबंधुओ और उनके तमाम करीबियों को.. 
मैं नेकी की राह पर दी जाने वाली #कुर्बानी की शुरुआत वाला वाकया और उसके पीछे छुपी अच्छाई के निकलते मायने सबके बीच रखना चाह रहा हूँ… !
(इस बाकये में शामिल किसी भी नाम की शान में अगर कोई गुस्ताखी होती मेहसूस हो तो मेरे  मकसद को तरजीह  देते हुए बरायेमेहरबानी मुझे माफ़ कीजियेगा!)
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#इस्लाम के ईश यानी सबसे #पवित्र और #सर्वोपरि #पाकपरवरदिगार / #हुज़ूरों के हुज़ूर अल्लाह ताल्हा ने अपने करीबियों में से सबसे अजीज़ जनाब इब्राहीम साहब से एक बहुत बड़े और अनोखे इम्तेहान से गुजरने की मंशा जाहिर की

हालाकि हुजूरों के हुजूर अल्लाह पाक तो जनाब इब्राहिम साहब की इस्लाम की जानिब #वफादारी और काबिलियत से अच्छी तरह बाकिफ थे मगर ‘हुजूर’ ने  मंशा जाहिर की कि जनाब इब्राहिम बाकी हाज़रात के बीच भी अपनी वफादारी का मुजाहिरा करें…इसलिये ‘हुजूर’ ने ‘जनाब’ इब्राहिम से दीन की नेकराह पर चलने की उनकी काबिलियत का मुजाहिरा करने उनसे, उनके सबसे प्यारे बेटे को भरे दरबार में सब की मौजूदगी में जिबह करने के इम्तेहान से गुजरने का हुक्म दिया… !
जनाब इब्राहिम ने अपने उसी बेटे से मशविरा की इजाजत मांगी, बेटे से मशविरा किया तो उनके बेटे ने भी दीन के लिये खुद के कुर्बान किये जाने को उननी खुशकिस्मती बाताया और खुशी खुशी रजामंदी दे दी…..
तब जनाब इब्राहिम ने अल्लाह हुजूर से इल्तिज़ा की कि उनके बेटे की गर्दन पर तलवार चलाने से पहले उनकी आँखों पर पट्टी बाँध दी जाये… ऐसा ही किया गया … बेटे ने गर्दन काटे जाने वाले लकड़ी के फट्टे पर खुद ही अपनी गर्दन रख दी.. और जनाब इब्राहिम ने आँखों पर पट्टी बंधी रहते बेटे की गर्दन पर तलवार से भरपूर वार किया.. सन्नाटा छा गया … जनाब ने जब आँखों से पट्टी हटाकर देखा तो उन्हें कटा हुआ मेढ़ा दिखाई दिया… !
अब यहाँ बहुत कुछ सोचने वाली बातें हैं

अगर हजूरों के हुजूर अल्लाह की निगाह में दीन की हिफाजत जोरआजमाइस में… कत्लोगारद में ही दिखती होती तो क्या वे अल्लाह हुजूर जनाब इब्राहिम साहब से उन्हीं के बेटे की गर्दन पर तलवार चलाने को थोड़े कहते.. बल्कि

वहाँ मौजूद साहिबान में से 2-4 के कत्ल का हुकुम सुनाते बल्कि
मौजूद में से 2-4 के कत्ल को कहते..

मगर इस मिसाल को कायम कर ‘अल्लाह हुजूर’ ने तमाम मुसलमानों को बहुत ही आला हिदायतें और ताकीदें की हैं… .

जैसे कि
– दीन-ए-इस्लाम नेकियों का मजहब है …
और नेकियों की राह इतनी कठिन है कि इसमें ताकत के इस्तेमाल बहुत बढ़कर… कदम-कदम पर… कुर्बानियों की जरूरत होगी…  ना कि से औरों के कत्ल की…!
और दीन की राह में बड़े-बड़े इम्तेहान.. बड़ी बड़ी कुर्बानियों की की जरूरत रहेगी… इसीलिये मुसलमान 
अपने आपको.. और उनके अपनों को, दीन के लिये कुर्बान कर देने का जज़बा बनाये रखें …
और भी बहुत बड़ी-बड़ी और खास नसीहतें छुपी ह़ैं कुर्बानी के इस बाकये की बयानगी में…
.
मेसेज हैं कि ..
– हुजूर अल्लाह जो सारे सरपरस्तों के भी सरपरस्त हैं उनकी खुद की ही नजर में इस्लाम कुर्बानियों की नींव पर खड़ी होने वाली बुलंद इमारत है..!
वक्त के बदलने के साथ आज के हालातों में खुद  हुजूर अल्लाह जी की मर्जी के मुताबिक  आज आप खुद की ही कुर्बानी के काबिल बनाये जा चुके हो..! आगे से आप खुद हर ‘ईद-उल-अजहा’ पर अपना खून देकर अपनी ही कुर्बानी दें… ! किसी निरीह को जिव्हा कर अपनी कुर्बानी का रुतबा हासिल करने की जगह किसी अनजाने जरूरतमंद को जिंदगी देने के लिये किसी ब्लडबैंक तक जाकर अपनी कुर्बानी दें.. अपने दोस्तों को समझाइश दें … जरूरी लगे तो मौलानाओं या इमामों से फतबा निकलवायें फिर अपने दोस्तों को बतायें… एक से एक जुड़कर

#कुर्बानी_क्लब बनायें… ‘ईद-उल-अजहा’ पर जगह जगह #ब्लडडोनेशन कैम्प्स लगवायें… और इस तरह नफरतों में जलकर खत्म होती इस दुनियाँ में खुद को और अपने महान मज़हब इस्लाम  को वो इज्ज्त पाने का हकदार बनायें जिसके कि हकदार  हैं सच्चे मुसलमान..!  तय आपको ही करना है… कि खुदापाक की दिखाई राह पर चल अपनी कुर्बानी या खुदा के बंदों के सिखाये बहानों पर चल नाम की कुर्बानी देनकर नुक्ता करते रहना है..!
– अपने सरपरस्त की सरपरस्ती में यकीन हो तो जनाब इब्राहिम जैसा ही हो..  बे-शुबहा… आँख बंद कर (आँखों पर पट्टी बाँध कर) भी हुक्म पर अमल करोगे तो भी कुछ खोओगे नहीं कुछ पाओगे ही.. अपने सरपरस्तों की जानिब ऐसे वफादार रहो!
– जब तुम्हारे सरपरस्त तुमसे किसी इम्तेहान से गुजरने की ख्वाहिश कह़ें  तो पूरी शिद्दत से इम्तेहान में अपने आपको झोंक दो..  बिना किसी शक ओ सुबहे के! सच्चे सरपरस्तों को भी  अपने अज़ीजों का इतना खयाल रहता है कि जितना तुम खुद भी तुम्हारा नहीं रख सकते!
– इस्लाम में मोहब्बत, अमन, यकीन और वफ़ा को वो रुतबा हासिल है जिसके सामने दुनियाँ की सारी दौलत … सारा हुश्न… सारी सहूलियतें बेमानी हैं..!
– ‘अज़ीम’

अच्छा या बुरा जैसा लगा बतायें ... अच्छाई को प्रोत्साहन मिलेगा ... बुराई दूर की जा सकेगी...

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