प्रेम – 1

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प्रस्तुत है ‘प्रेम’…
1- धन, छल, बल या भयवश अंक समाये…
क्या उसे भी प्रेममय समर्पण समझा जाये… ?
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अच्छा या बुरा जैसा लगा बतायें ... अच्छाई को प्रोत्साहन मिलेगा ... बुराई दूर की जा सकेगी...

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