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उत्तुंग तने खड़े हैं!

पहाड़ बड़े हैं!
जगह-जगह अड़े हैं!
उत्तुंग तने खड़े हैं!
क्या चलकर उन्हें झुकायें?
अपने बराबर पर लायें?

..मगर क्यों?
… क्यों मानमर्दन करें?
…. क्यों उन्हें झुकायें?
क्यों बराबर पर लायें?
वो बनावटी थोड़े हैं..
नियति निर्मित बड़े हैं!
तभी स्वभावत:
तनकर खड़े हैं!

traffictail
Author: traffictail

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