स्वच्छता प्रबंधक संत

द्वारा प्रकाशित किया गया

“विभिन्न प्रकार की गंदगियों में से हर तरह की #गंदगी_से_मुक्ति देने, दिलाने या इसका मार्ग बताने वाले; #संत_सम_सम्माननीय हैं!”
“यूँ तो विश्व भर में गंदगी फैलाने में #सम्पूर्ण_मानवजाति _ही_सम्मिलित हैं… किंतु इनमें से मात्र जुगुप्सा प्रदर्शित कर #नाक_भों_सिकोड़ने_वाले_मनुज सबसे बड़े मूर्ख हैं..

और

सबकी फैलाई जाती #गंदगी_का_प्रबंधन कर मुक्ति देने वाले सबसे आदरणीय!”

जबकि #आधुनिक_इतिहास_के_अधिकांश_महामूर्ख मानव उन्हें ही निम्नतर मानने लगे थे जो #वास्तविक_मुक्तिदाता हैं!
वे भी ठीक वैसे ही सम्मान के पात्र हैं जैसे कि #वैचारिक_स्वच्छता के #मार्ग_प्रशस्कर्ता का सम्मान सारा जग किया करता है!
इस मूलभूत #तथ्य_से_अपरिचय ही वैचारिक के साथ साथ भौतिक गंदगी की समस्या के निराकरण के पथ का सबसे बड़ा रोड़ा है!

विचारिये ! स्वीकारिये!! सुधारिये!!!

अच्छा या बुरा जैसा लगा बतायें ... अच्छाई को प्रोत्साहन मिलेगा ... बुराई दूर की जा सकेगी...

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